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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

इस पद में स्थिति ही हम जैसे जीवन्मुक्तो की समाधि और व्युत्थान में तुल्यरूप स्थिति है, ऐसा कहते हैं। हे राघव, दुःखविनाशक इस पद में स्थित होकर हम लोग समाधि और व्यवहार में समानरूप से इस तरह स्थित हैं