Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 196, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 196, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 196 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
शिला के गर्भ के समान विक्षेपशून्य स्थितिवाले हम
प्रबुद्ध लोगों का यह निर्दोष पद है । आप भी आज से लेकर हमारे सदृश ही इसे प्राप्त कर इसमें
(जीवन्मुक्ति में) विराजमान होइए