Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 197, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 197, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 197 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
शास्त्र नाना शब्दों ओर अर्थो का भण्डार है ओर परमपद अनाम है । यानी शब्दप्रवृत्ति निमित्तशून्य होने
और असंस्पृष्ट होने के कारण परमपद न पदार्थ है और न वाक्यार्थ ही हे