Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 199, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 199, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 199 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
शिबि आदि राजाधिराज और दूसरे धर्मव्याध आदि
साधारण लोग भी समदृष्टिता का दृढ़ अभ्यास करने से महापुरुषों के भी पूजनीय हो गये हैं