Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 201, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 201, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 201 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
भुञ्जे पिबामि तिष्ठामि पालयामि निजक्रियाम् ।
जातोऽहं विगताशङ्कस्त्वत्प्रसादान्मुनीश्वर ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
राजा दशरथ ने कहा : हे गुरुवर,
आपके सदुपदेश से प्राप्त क्षयबुद्धिविहीन बोधमय निरतिशयानन्दरूप आत्मवस्तु से मेरे अन्दर
सर्वोत्कृष्ट पूर्णता उत्पन्न हो गई है