Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 203, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 203, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 203 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
उत्फुल्लहृदयाम्भोजस्फाराकारतया तदा ।
लीलापद्माकरा रेजुस्तत्रस्थाः पार्थिवा इव ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वज्ञानविशारद वामदेव आदि सब लोगों ने वाह
भगवान् श्रीवसिष्ठजी ने क्या उत्तम ज्ञान का वर्णन किया, यह बड़े सम्मान से कहा