Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 203, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 203, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 203 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
रवावौर्वोपत्र व्योम महाब्धेर्नाभितां गते ।
तेजःपुञ्जलसज्ज्वाले समग्ररसपायिनि ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रभो, हम लोग पहले केवल शरीर में आत्मदुष्टिवाले थे इस समय आपके अनुग्रह
से सर्वत्र सर्वात्मदर्शी हो गये हैं