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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 206, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 206, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 206 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

प्रजा प्राप्नोत्यसंबन्धैरमूर्तैरत्र कः क्रमः । स्तम्भो वरेण सौवर्णो विना हेमगमागमैः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसा यह आपने जाना है, जैसा आगमों द्वारा वर्णित है वह सब ज्यों-का-त्यों स्थित है इसके विषय में और क्या वर्णन करें ? यानी आपको जो प्रकार ज्ञात है उसीका आपके प्रति कथन अपूर्व नहीं है, इसलिए उसका वर्णन उचित नहीं है