Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 32
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हिन्दी अर्थ
चिदाकाश के संकल्पनगराकार यथास्थित
विश्व (सारा जगत्) तथोक्त निर्विकार निर्दोष निर्मल ब्रह्म ही है