Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 211, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 211, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 211 · श्लोक 41
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हिन्दी अर्थ
लौकिक कार्य असत्य है लेकिन मोक्ष सत्य है इन दोनों मे यह अवान्तर भेद भले ही हो किन्तु साधन
के उद्योग और उनके फल का अनुभव दोनों में समान है उनमें कोई अन्तर नहीं है, इस अभिप्राय से
कहते हैं।
जो वस्तु जैसे अनुभव में आती है उसकी प्रतीति भी वैसे ही होती है वह सत्य हो जाहे असत्य
हो जब तक उसकी उपलब्धि रहती है तब तक ज्यों की त्यों रहती है