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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 22, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 22, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

एकान्धकारे संपन्ने व्यवहारो युगक्षये । निर्विभागो निराभासो यथा ब्रह्मघने तथा ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

छष्टिशन्दार्थ से रहित होने में प्रलय दष्टान्त है, यह कहते हैं । जिस तरह कल्प के अन्त में एकमात्र अंधकार के रहते ब्रह्मघन में निर्विभाग ओर निराभास ही सृष्टि रहती है उसी तरह तत्त्वज्ञानियों को असद्रूप भी यह जगत्‌ सद्रूप ब्रह्म ही भासता है