Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 23, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 23, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
मणिर्मधुरकाषेण यथैति विमलात्मताम् ।
तथा कषायपाकेन चित्तमेति विवेकिताम् ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे धीरे-धीरे शाणपर घिसने से मणि निर्मलरूपता
को प्राप्त होती है वैसे ही काषायों के परिपाक से चित्त विवेकता को प्राप्त होते हैं