Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 24, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 24, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
शाम्यन्ति मोहमिहिकाः शरदीव साधौ प्राप्ते भवन्ति विमलाश्च तथाखिलाशाः ।
सत्येति वाग्भवतु साधुजनोपगीता मद्बोधनेन भवता भवशान्तिदेन ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भगवन्, शरत्काल के सदुश निर्मल, स्वच्छज्ञान, विवेकादि ज्योतिर्गणमण्डित साधु गुरु के प्राप्त
होने पर आकाशतुल्य शिष्य के मोहरूपी कुहरे शान्त हो जाते हैं तथा सारी दिशाएँ-जैसे आशाएँ
(मनोरथ) धूलि आदि मलों -जैसे रागादि-मलों से रहित हो जाती हैं, यह लोक मे प्रसिद्ध साधुजनों
के द्वारा कही गयी वाणी संसार के शान्तिदायक आपके उपदेश से मेरे लिए सत्य हो