Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
या सत्ता ब्रह्मशब्दाख्या रूपं सर्वस्य तन्निजम् ।
न यत्र काचिद्वाधास्ति सर्वं तन्मयमव्ययम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
वही सब पदार्थों का किसी काल में बाधित न होनेवाला स्वरुप है, यह कहते हैं ।
ब्रह्मशब्द से जो सत्ता कही जाती है, वह सत्ता ही सब पदार्थों का निजी स्वरूप है, उसमें किसी
तरह की बाधा नहीं है ओर समस्त जगत् तन्मय है अतएव वह अव्ययरूप है