Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 26, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 26, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
तनोति यत्तदास्मैव तस्य तत्र तथा स्थितम् ।
दृश्याभावादसद्दृश्यं तेन कः क्व करोति किम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
मनोराज्य के सदृश मन जिस किसीका
निर्माण करता है, वहाँ सर्वत्र उन-उन वस्तुओं की प्रतीति बनकर स्वयं ही स्थित हो जाता
है। इस प्रकार नामरुपात्मक प्रपंच के : मन से भिन्न कोई अन्य चीज-न होने से कौन, कहाँ
किस प्रकार जगत् का निर्माण कर सकता है ?