Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
ययैव वेत्सि ततया युक्त्या पुरुषयत्नतः ।
वासनाङ्कुरनिर्मूलमेतदेव परं शिवम् ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
वह
युक्ति चाहे पहले कही गई राज-योगरूपा हो या हठयोगरूपा हो, परन्तु पुरुष प्रयत्न से दीर्घकालतक
वह अभ्यस्त होनी चाहिए । आप अपनी वासना का उच्छेद जिस युक्ति से सरल समझते हों, उसी
से उसका उच्छेद कर डालिए क्योकि यह वासनांकुर का उच्छेद ही परम कल्याण है