Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 28, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 28, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
न बीजमादावस्त्यन्यन्नाङ्कुरो न च वा नरः ।
न कर्म न च दैवादि केवलं चिदुदेति हि ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
सबसे प्रथम न तो कोई चिति के सिवा
दूसरा बीज है, न अंकुर है, न पुरुष है, न कर्म है और न दैव आदि ही कुछ है, केवल चिति का ही
यह सब कुछ विलास है