Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
एवमाद्यन्तरहितमभ्यासेन शनैःशनैः ।
पदमासादयाद्वन्द्वमतीतं सर्ववस्तुतः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस
तरह धीरे-धीरे अभ्यास के द्वारा आप आदि-अन्त से रहित एेसा पद प्राप्त कीजिए, जो समस्त
शीत-उष्ण आदि द्रन्द्रों से रहित तथा सब वस्तुओं से परे हैं