Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 41
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 41
संस्कृत श्लोक
वागतीतपदस्थो हि कथं गृह्णाति वाङ्मलम् ।
अवाच्यं वच्मि नो तेन वाग्धि संकल्पनाङ्किता ॥ ४१ ॥
हिन्दी अर्थ
जो वाणी से अतीत पद
में बैठा है, वह वाणीरूप मल को कैसे ग्रहण करेगा ? इसलिए मैं अवाच्य (कहने के अयोग्य वस्तु)
नहीं कहता, क्योकि वाणी संकल्परूप कलंक से युक्त ही रहती है