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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 49

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 49

संस्कृत श्लोक

अबहिःसाधनं शान्तमनन्तःसाधनं समम् । न सुखं नासुखं नाहं नान्यदित्यादि तं शिवम् ॥ ४९ ॥

हिन्दी अर्थ

परमपद का ही विशेषरूप से वर्णन करते हैं / भद्र, जो बाहर के साधनों से निर्मुक्त है, जो अन्दर के साधनों से शून्य है, जो कर्तापन एवं भोक्तापन से रहित है, जो सुखरूप नहीं है, जो दुःखरूप नहीं है, जो अन्यरूप नहीं है, जो शान्त और सम है तथा जो सबका आदि है, वही स्वप्रकाश-निरतिशय आनन्दरूप शिवपद हे