Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
तत्राहंता न च त्वत्ता नानहंता न चान्यता ।
केवलं केवलीभावो निर्वाणममलं शिवम् ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर (परमपद में) न अहन्ता है, न त्वत्ता है, अहन्ता का अभाव है, न अन्यरूपता है। वह
निर्वाणपद केवल विशुद्ध शिवरूप कैवल्य ही है