Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
चेतनस्याचेतनत्वमचेत्योन्मुखतात्मकम् ।
मोक्षं विद्धि परं शान्तं पदमव्ययमेव च ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
विषय सम्बन्ध के अभाव से प्राप्त अवेतनता तो मो में इष्ट ही है, यह कहते हैं ।
चेतन की विषयों की ओर प्रवृत्ति न होना ही अचेतनता है, इसी को आप मोक्ष जानिए । मोक्ष
ही अविनाशी शान्त परमपद है