Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 29, Verse 71
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 29, verse 71 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
वासनाभिरुपेतोऽपि समस्ताभिरवासनः ।
भवत्यसावसत्सर्वमिदमित्येव यस्य धीः ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
अतएव बाधित अर्थ की वासना वासना ही नहीं है, ऐसी स्थिति में ज्ञानी वाग्ननारहित ही हैं,
यह कहते हैं /
जिस पुरुष को यह बुद्धि रहती है कि यह सब असत् ही है वह वासना से युक्त होता हुआ भी
समस्त वासनाओं से रहित ही है