Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 3, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 3, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अवेदनमसंवेद्यं यदवासनमासितम् ।
शान्तं सममनुल्लेखं स कर्मत्याग उच्यते ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयों से विनिर्मुक्त, वासनाओं से शून्य, सुदृढ़रूप से स्थित, शान्त, एकरूप, कृत
और अकृत के अनुसन्धान से रहित जो अवेदन है वही कर्मत्याग कहा जाता है