Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
सर्वं दृश्यं जगद्ब्रह्म सदित्यवगते स्फुटम् ।
जलशोषादिवोदेति बिम्बबिम्बिक्षये शिवम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सारा दृश्य जगत सद्रूप ब्रह्म ही है, ऐसा स्पष्ट ज्ञान हो जाने पर विम्ब
और बिम्बी यानी चिदाभास और उसकी उपाधि दोनों के नाश से जल सूखने से बिम्बरूपता
की नाई, एकमात्र शिवस्वरूपता ही उदित होती है