Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 31, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 31, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
मिथ्यावभासे संकल्पनगरे कैव नष्टता ।
तथा जगदहंत्वादौ नाशो नासति विद्यते ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
मिथ्या अवभासित हो रहे असत् संकल्प नगर का नाश ही
क्या (मिथ्या) है ? ठीक इसी तरह असद्रूप जगत् ओर अहंकार आदि का नाश ही क्या?
असत् का वस्तुतः नाश नहीं है