Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 32, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अत्यन्ततनुतां याता वासनैवैति मुक्तताम् ।
पराणुपरिणामेन खतां खेऽभ्रादिका यथा ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
अत्यन्त तनुता को
(क्षीणता को) प्राप्त वासना ही ऐसे मुक्तिरूप बन जाती है, जैसे आकाश में मेघ, कुहरा आदि
अत्यन्त सूक्ष्म बनकर आकाशरूप बन जाते हैं