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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 32, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 32, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

तद्ध्यानं स समाधिर्वा यदवेदनमासितम् । अजडानां जडमिव समं शान्तमनामयम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

अब मोक्ष में स्वाधीनता का उपपादन करते हैं / वही ध्यान और समाधि है, जो कि विद्या से मूलभूत जड़ता के हट जाने के बाद चिदात्मा के साथ एकरस हो जाने के कारण अजड़ मन, बुद्धि आदि पदार्थों की पत्थर के सदृश निश्चय वेद्यवेदन निर्मुक्त स्थिति है । सम, शान्त और निर्विकार यही स्थिति मुक्ति है