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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

परलोकमहाव्याधौ प्रयतन्ते चिकित्सनम् । शमसत्सङ्गबोधाख्यैरमृतैः पुरुषोत्तमाः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जो उत्तम पुरुष है, वे परलोक की महाव्याधि की चिकित्सा के लिए शान्ति, सत्संगति तथा आत्मविचाररूप अमृततुल्य उपायों से प्रयत्न करते हैं