Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 33, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 33, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
इहलोकचिकित्साभिर्जीवितं यातु मा क्षयम् ।
आत्मज्ञानौषधैरज्ञाः परलोकश्चिकित्स्यताम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अज्ञानीजनों, तुम लोग इस लोक की
चिकित्सा में निरत होकर अपना जीवन क्षीण मत करो, परन्तु आत्मज्ञान के औषधों से परलोक की
चिकित्सा करो