Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 34, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 34, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
यथाभ्रे लक्ष्यते वृक्षगजवाजिमृगादिता ।
असन्निवेशाकृतिनि सर्गाहन्ते तथापरे ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश में वृक्ष, हाथी, घोड़े आदिका रूप
दिखाई पड़ता है, वैसे ही अवयव एवं आकाररहित ब्रह्म में सृष्टि एवं अहंकार का रूप दिखाई पड़ता
है