Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 36, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 36, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 36 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
स विश्रान्तमना मौनी यस्य प्रकृतकर्मसु ।
स्पन्दो दारुनरस्येव विगतेच्छमनाकुलम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इच्छा के अभाव में भी जीवन के हुभ्रुत व्यवहार की सिद्धि कत्लाते है/
वही विश्रान्तचित्त जीवन्मुक्त मुनि है, जिसकी चेष्टा प्रारब्ध प्राप्त कर्मों में इच्छाशून्य तथा
बिना व्याकुलता के, कठपुतली के समान होती रहती है