Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 37, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 37, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 37 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
नानिच्छया नेच्छयाथ न सता नासता सदा ।
नैवात्मना न चान्येन नैतैर्मरणजीवितैः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
न तो इच्छा से, न अनिच्छा से, न सद्वस्तु
से, न असद्रस्तु से, न अपने से, न दूसरे से और न इन जीवन-मरणों से तत्त्वदर्शी को किसी भी
समय अर्थ का लाभ होता है