Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
शान्ताशेषविशेषस्य निरेषणविशेषतः ।
सत्तामसत्तां सदृशौ क आकलयितुं क्षमः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसको अशेष विशेषो से शान्ति हो चुकी है तथा
जो इच्छाओं से रहित हो गया हे, ऐसे वैभव एवं दरिद्रता दोनों को समान देखनेवाले ब्रह्मज्ञानी
की महिमा कौन जान सकता है ?