Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
सम्यक्परीक्षितं यावन्न भ्रान्तिर्न परीक्षकाः ।
न नाम जन्ममरणे केवलं शान्तमव्ययम् ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
उत्तम परीक्षा कर लेने के बाद, न तो भ्रान्ति रहती है, न परीक्षक रहते
हैं और न जन्म-मरण ही रहते हैं, केवल कुछ रहता है, तो वह अविनाशी प्रशान्त ब्रह्म ही
रहता है