Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 38, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 38, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 38 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
निर्वासना निष्कलना शान्ता पुरुषतास्तु ते ।
शास्त्रेण यन्त्रवाहेन वाह्या दारुमयी यथा ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जैसे काठ की पुरुषोचित चेष्टा का यन्त्ररूपी घोडे से
निर्वाह होता है और वह जैसे वासनाशून्य, संकल्पशून्य एवं उपद्रवरहित होती है, उसी तरह
शास्त्ररूपी घोड़े से आपकी वैसी ही पुरुषोचित चेष्टा का निर्वाह हो