Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 4, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 4, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 4 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
अहमर्थादियं बीजात्सत्ता बिम्बलतोत्थिता ।
यस्यां जगन्त्यनन्तानि फलान्यायान्ति यान्तिच ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए अहंकाररूपी बीज से यह दृश्यप्रपंच की सत्तारूपी
बिम्ब लता उदित हुई है। जिसमें व्यष्टिभाव से अनन्त जगत्रूपी फल उत्पन्न और नष्ट होते
रहते हैं