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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 40, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 40, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 40 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

। अस्वभावात्मता सर्गः स्वभावैकात्मता शिवः । भूयतां परमव्योम्ना शाम्यतां मेह ताम्यताम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मस्वरूप से विरुद्ध भावना करना सृष्टि है तथा स्वभावात्मक ब्रह्मरूप की प्राप्ति कल्याण है । इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, आप परम चिदाकाशरूप हो जाइये, शान्ति प्राप्त कीजिये