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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

रुद्रोपेन्द्रादिपूजात्र जरत्तृणलवायते । विचारशमसत्सङ्गबलिपुष्पैकपूजितः ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

विचार, शम और सत्संगरूपी बलिदान -पुष्पों से पूजित हुआ परमेश्वर शीघ्र मोक्षफल प्रदान करता हे । हे साधो, यह स्वात्मा ही परमेश्वर है