Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

एकान्तेष्वेव तिष्ठन्तु चित्रकर्मार्पिता इव । संकल्पशान्तौ संकल्पपुरवत्सर्वदाखिलम् ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

भद्र, संकल्प की शान्ति हो जाने पर जैसे संकल्पनगर शान्त हो जाता है अथवा जाग्रत्‌-पुरुष के लिए स्वप्न नष्ट हो जाता है वैसे ही समाधि और व्यवहार दशा में निरन्तर आत्मज्ञान से सम्पन्न पुरुष के लिए सम्पूर्ण जगत्‌ सदा के लिए ही विनष्ट हो जाता है