Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 42, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 42, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 42 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
यथा द्रवत्वं पयसि यथा शून्यत्वमम्बरे ।
यथा प्रस्पन्दनं वायौ महाचिति तथा जगत् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे जल में द्रवता, आकाश में शून्यता, वायु में स्पन्दता है, वैसे ही
महाचिति में यह जगत् है