Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 43, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 43, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 43 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
मानवा वातलोलोच्चपत्रप्राप्ताम्बुभङ्गुर ।
मानवासु न चास्वन्धगर्भशय्यासु सुप्यताम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मनुष्यों, ऊँची
शाखाओं में स्थित पीपल के पत्तों पर गिरे तथा वायु द्वारा कम्पित हुई ओस की वृदां के सदृश
क्षणभंगुर मनुष्य शरीरोंवाली इन संसाररूपी अन्धकारपूर्ण गर्भशय्याओं पर आप शयन मत करें