Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
उन्नतानतसंपातनिपातेनातिघूर्णितः ।
विकारोपलनिर्घातैः पारम्पर्येण चूर्णितः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वर्ग, नरक आदिरूप ऊँचे-नीचे स्थानों में क्रमशः चढ़ने-
गिरने से इसके मस्तक में चक्कर आ गया है तथा काम, क्रोध आदिरूप पत्थरों की निरन्तर चोट
खाने से यह चूर्ण-चूर्ण हो गया है