Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 44, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 44, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 44 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
विषयाजगरोदारविषफूत्कारमूर्च्छितः ।
कामुकः कामिनीभूमौ रसात्प्रायो विपोथितः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयरूपी अजगरो के भयानक
विषरूपी फुफकार से यह मूर्छित हो गया है तथा कामिनीरूपी भूमि में कामुक यह मनरूपी मृग
विषयरस से प्रायः मर्दित हो गया है