Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 46, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
दृश्यस्वदनमुक्तस्य सम्यग्ज्ञानवतो मुनेः ।
निर्विकल्पं समाधानमविरामं प्रवर्तते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जो पुरुष विषयों के स्वाद से मुक्त है एवं
विवेकज्ञान से सम्पन्न है उस महामुनि को निर्विकल्प समाधि निरन्तर लगी रहती है