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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 46, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 46, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 46 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

स्वयमेव ततस्तत्र निरस्तसकलैषणम् । अनाद्यन्तमनायासं ध्यानमेवावशिष्यते ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

उस समय समस्त इच्छाओं से शून्य रहने के कारण कोई दूसरी गति न होने से वह आदि-अन्तशून्य आत्म-ध्यान ही परिशेष मेँ अगवत होता है