Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 47, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 47, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 47 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
नवनीतस्थलीवाऽच्छा स्निग्धा मृद्वी मनोहरा ।
जनं सुखयति स्वाद्वी तदीया नवसंगतिः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसे महापुरुष की पहली संगति ही
पुरुष को सुख पहुँचाती है, उसकी संगति मक्खन के आश्रय दही के सदृश स्वच्छ होती है तथा
स्नेह से भरपूर, कोमल, मनोहर और स्वादु रहती है