Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
तस्यामवस्तुभूतायां कथं भावनिबन्धनम् ।
भविष्यदाकाशतरौ विश्रान्तः को विहंगमः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
शून्यता प्रसाधन का फल कहते हैं ।
अवस्तुभूत उस शून्यता में विवेकी पुरुष को अहन्ता, ममता, राग-द्वेष आदि भावों का बन्धन
भला कैसे हो, क्योकि भविष्यत् आकाशरूपी वृक्ष में किस पक्षी ने विश्रान्ति प्राप्त की हे