Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
स्वप्नाद्यर्थवदादत्ते बोधोऽबोधेन पिण्डताम् ।
तद्ग्राहकतया चित्तं भूत्वा बध्नाति देहकम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह चिदात्मा ही अपने स्वरूप के ज्ञान से स्वप्नकाल के
पदार्थों के समान पिण्डरूपता को यानी पदार्थो के मूर्तिमान् आकार को धारण करता है तथा उसके
ग्राहकरूप से चित्त बनकर फिर शरीर धारण कर लेता है