Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 49, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 49, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 49 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
वासनातानवेनैव संसार उपशाम्यति ।
वासनैव महायक्षिण्येतच्छेदपरा बुधाः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र वासना के क्षय से ही यह संसार उपशान्त हो जाता है । यह वासना ही महायक्षिणी हे ।
विवेकी महानुभाव लोग इसके नाश में लगे हुए रहते हैं